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दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिकः संकट और समाधान

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डॉ. चेतन आनंद-
दिल्ली-एनसीआर भारत का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है, जहाँ लगभग 4.6 करोड़ लोग रहते हैं। यह क्षेत्र न केवल राजनीतिक राजधानी है, बल्कि आर्थिक, शैक्षिक और औद्योगिक गतिविधियों का भी मुख्य केंद्र है। ऐसे में यहाँ की सड़कों पर ट्रैफिक का बोझ लगातार बढ़ना स्वाभाविक है। पिछले पाँच वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अकेले दिल्ली में पंजीकृत वाहनों की संख्या 1.3 करोड़ से अधिक हो चुकी है, जबकि रोज़ाना करीब 80-90 लाख वाहन सड़कों पर उतरते हैं। इसके साथ ही गाज़ियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद से लाखों यात्री रोज़ दिल्ली आते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो गई है।

ट्रैफिक लोड का बढ़ता दबाव
2018 से 2023 तक के आँकड़ों के अनुसार दिल्ली में निजी कारों की संख्या 25 प्रतिशत बढ़ी। दोपहिया वाहनों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। एनसीआर से दिल्ली आने वाले बाहरी वाहनों की संख्या रोज़ाना 12-15 प्रतिशत तक बढ़ी। ट्रैफिक जाम में औसतन यात्रा समय 35 प्रतिशत तक बढ़ गया। टॉम टॉम ट्रैफिक इंडेक्स की 2023 रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली दुनिया का चौथा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है, जहाँ लोगों को पीक-ऑवर में 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 30-40 मिनट तक लग जाते हैं। यह केवल समय की बर्बादी नहीं, बल्कि ईंधन की खपत और पर्यावरणीय प्रदूषण को भी बढ़ाता है।

सरकारी प्रयास
समस्या की गंभीरता को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं।
1-मेट्रो विस्तार, दिल्ली मेट्रो की लंबाई 390 किमी से अधिक हो चुकी है और इसे एनसीआर तक फैलाया गया है। रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम का निर्माण भी तेज़ी से चल रहा है।
2-ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली से गैर-जरूरी ट्रक ट्रैफिक को बाहर निकालने के लिए ये प्रोजेक्ट पूरे किए गए।
3-इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और सेंसर आधारित सिग्नल सिस्टम लागू किए जा रहे हैं।
4-ऑड-ईवन नीति, प्रदूषण और भीड़ दोनों घटाने के लिए प्रयोग किए गए।
5-इलेक्ट्रिक बसें और सीएनजी नीति, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को साफ-सुथरा और बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास हुए।
हालाँकि, इन प्रयासों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर राहत सीमित ही दिखी है। कारण यह है कि वाहन वृद्धि की गति और शहरीकरण की रफ़्तार, योजनाओं की क्षमता से कहीं अधिक तेज़ है।

सुधार के आवश्यक सुझाव

1. ट्रैफिक प्रबंधन और नीतिगत सुधार


ए-इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंटः दिल्ली की सभी प्रमुख सड़कों पर स्मार्ट सिग्नल और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जरूरी है।
बी-पुरानी गाड़ियों पर सख्तीः 10 साल पुरानी डीज़ल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर खदेड़ने का प्रस्ताव प्रभावी रूप से लागू हो।
सी-पीक-ऑवर ट्रैफिक पॉलिसीः ऑड-ईवन को केवल आपातकालीन प्रयोग न मानकर, नियमित ट्रैफिक प्रबंधन नीति का हिस्सा बनाया जाए।

2. सार्वजनिक परिवहन सुधार


ए-मेट्रो और आरआरटीएस का विस्तारः मेरठ, पानीपत और अलवर कॉरिडोर को समय पर पूरा किया जाए और उन्हें दिल्ली मेट्रो से जोड़ा जाए।
बी-बस प्रणालीः डीटीसी और क्लस्टर बसों की संख्या दोगुनी हो, और डेडिकेडेट बस लेन लागू की जाए।
सी-लास्ट-माइल कनेक्टिविटीः मेट्रो और बस स्टेशनों पर ई-रिक्शा, साइकिल-शेयरिंग और पार्किंग सुविधाएँ व्यवस्थित हों।

3. सड़क और शहरी डिज़ाइन सुधार


ए-बॉटल-नेक्स हटानाः एम्स, धौला कुंआ, आईटीओ, आश्रम चौक और गाजीपुर जैसे स्थायी जाम बिंदुओं पर फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएँ।
बी-पेरिफेरल रोड्स का उपयोगः एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक डायवर्जन कड़ाई से लागू हो।
सी-स्मार्ट पार्किंग पॉलिसीः अवैध पार्किंग पर रोक और मल्टी-लेवल पार्किंग की सुविधा।

4. टिकाऊ और दीर्घकालिक समाधान


ए-ट्रांजिट एंड ऑरिएंटेड डवलपमेंट, मेट्रो स्टेशनों के आसपास ऑफिस और हाउसिंग विकसित हों ताकि लोग लंबी दूरी तय न करें।
बी-साइकिल और पैदल संस्कृतिः सुरक्षित लेन और पैदल-पथ से छोटी दूरी के लिए कार पर निर्भरता कम की जा सकती है।
सी-जन-जागरूकता और प्रवर्तनः यातायात नियम उल्लंघन पर कड़ी सज़ा और कार एंड फ्री डे जैसी पहल।

संभावित रोडमैप
1-तुरंत (1-2 वर्ष)ः आईटीएमएस लागू करना, पुरानी गाड़ियों पर सख्ती, स्मार्ट पार्किंग, बसों की संख्या बढ़ाना।
2-मध्यम अवधि (3-5 वर्ष)ः आरआरटीएस का पहला चरण पूरा करना, डेडिकेडेट बस लेन्स और मेट्रो के नए कॉरिडोर खोलना।
3-दीर्घकालिक (5-10 वर्ष)ः टीओडी मॉडल अपनाना, साइकिल और पैदल-मार्ग संस्कृति विकसित करना, ट्रैफिक न्यूट्रल शहरी डिज़ाइन।

दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक संकट केवल सड़क की समस्या नहीं है, यह सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौती भी है। रोज़ाना लाखों घंटे और करोड़ों लीटर ईंधन बर्बाद होते हैं। प्रदूषण स्तर खतरनाक सीमा तक पहुँच चुका है। अगर अभी ठोस और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और बिगड़ सकते हैं। सही दिशा में उठाए गए कदम जैसे मजबूत सार्वजनिक परिवहन, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिकों की भागीदारी दिल्ली-एनसीआर को इस संकट से बाहर निकाल सकते हैं। यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझी जिम्मेदारी है कि वह नियमों का पालन करे और पर्यावरण के अनुकूल यातायात विकल्प अपनाए।

लेखक-
डॉ. चेतन आनंद
(कवि-पत्रकार)