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50 हज़ार से अधिक उद्योगों वाले जिले में सिर्फ़ 3 अफ़सर जिसमें से दो को कोई अधिकार नहीं : सत्येन्द्र सिंह

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आईसीआईएम का सीएम योगी को ज्ञापन औद्योगिक राजधानी गौतम बुद्ध नगर को चाहिए मज़बूत श्रम विभाग

यूपी – नोएडा 1 सितंबर इंडियन काउंसिल ऑफ इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट (ICIM) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है, जिसमें गौतम बुद्ध नगर जिले में श्रम विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को मज़बूत करने और अतिरिक्त पदों के सृजन की तात्कालिक आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है। इस ज्ञापन का उद्देश्य जिले के श्रमिकों और नियोक्ताओं दोनों को न्याय, सहयोग एवं सुविधा उपलब्ध कराना है।

आईसीआईएम का परिचय और भूमिका

आईसीआईएम एक प्रतिष्ठित संगठन है, जिसके साथ 20,000 से अधिक उद्योग जगत से जुड़े निदेशक, उपाध्यक्ष, मुख्य वित्त अधिकारी (CFO), चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी, एचआर प्रोफेशनल और अधिवक्ता जुड़े हैं। संगठन लंबे समय से औद्योगिक विकास, श्रम कानूनों के अनुपालन और औद्योगिक संबंधों की सुगमता के लिए कार्य कर रहा है।

चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का मुकुट माने जाने वाले गौतम बुद्ध नगर में श्रम विभाग की वर्तमान स्थिति अत्यंत दयनीय है और तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

गौतम बुद्ध नगर का औद्योगिक परिदृश्य

गौतम बुद्ध नगर न केवल उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक ज़िला है बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है। यहाँ से राज्य सरकार को सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है। वर्तमान में जिले में:
• लगभग 8,000 फैक्ट्रियाँ फैक्ट्री अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हैं।
• लगभग 9,000 प्रतिष्ठान दुकानदार एवं वाणिज्यिक अधिष्ठान अधिनियम के अंतर्गत आते हैं।
• लगभग 3,000 ठेकेदार कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के अंतर्गत कार्यरत हैं।
• इसके अलावा, करीब 25,000 इकाइयाँ बिना किसी पंजीकरण के संचालित हो रही हैं।

इस प्रकार, जिले में कुल मिलाकर 50,000 से अधिक औद्योगिक इकाइयाँ सक्रिय हैं, जो प्रदेश के किसी अन्य ज़िले की तुलना में सर्वाधिक हैं।

श्रम विभाग में कार्मिक संकट

इतने बड़े औद्योगिक ढाँचे और लाखों श्रमिकों के बावजूद, गौतम बुद्ध नगर जिले के श्रम विभाग में वर्तमान में केवल एक उप श्रम आयुक्त (Deputy Labour Commissioner) और दो सहायक श्रम आयुक्त (Assistant Labour Commissioner) ही कार्यरत हैं। कई लिपिकीय पद लंबे समय से रिक्त हैं और कुछ अधिकारी शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

इस अपर्याप्त स्टाफ के कारण हजारों श्रमिक और औद्योगिक मामले लंबित पड़े हैं। शिकायत निवारण, अनुपालन की जाँच और औद्योगिक विवादों के समाधान की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। साथ ही, नोएडा–ग्रेटर नोएडा–यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में नए कारखानों और व्यवसायों की तेजी से बढ़ती संख्या से कार्यभार और अधिक बढ़ गया है।

आईसीआईएम की प्रमुख माँगें

आईसीआईएम ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से निम्न माँगें रखी हैं:
1. गौतम बुद्ध नगर जिले के श्रम विभाग में नए पदों का सृजन किया जाए।
2. लम्बे समय से रिक्त पड़े लिपिकीय और सहायक पदों पर तुरंत नियुक्तियाँ हों।
3. कम से कम –
• 1 अपर श्रम आयुक्त (Additional Labour Commissioner)
• 2 उप श्रम आयुक्त (Deputy Labour Commissioners)
• 6 सहायक श्रम आयुक्त (Assistant Labour Commissioners)
की नियुक्ति की जाए, ताकि विभाग सुचारु रूप से कार्य कर सके।

ईपीएफओ का उदाहरण

आईसीआईएम ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि पिछले वर्ष कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने जिले में बढ़ते कार्यभार को देखते हुए अतिरिक्त क्षेत्रीय आयुक्त और स्टाफ की नियुक्ति की थी। इससे न केवल शिकायत निवारण की गति बढ़ी, बल्कि नियोक्ताओं और श्रमिकों दोनों को तत्काल राहत मिली।

संगठन ने ज़ोर दिया कि राज्य का श्रम विभाग भी इसी तरह का कदम तुरंत उठाए, जिससे जिले की औद्योगिक इकाइयों और श्रमिकों को न्याय मिल सके।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के लिए महत्व

आईसीआईएम के चेयरमैन सत्येन्द्र सिंह ने कहा कि,
“यदि श्रम विभाग में समय रहते नए पद और अधिकारी नियुक्त नहीं किए गए, तो औद्योगिक विवाद बढ़ेंगे, अनुपालन में देरी होगी और नियोक्ता व श्रमिक दोनों को कठिनाइयाँ झेलनी पड़ेंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में यदि यह सुधार लागू होता है तो यह प्रदेश को भारत का अग्रणी औद्योगिक केंद्र बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि यह सुधार “न केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि नियोक्ताओं की ज़िम्मेदारियों को भी सुव्यवस्थित ढंग से लागू करेगा।”

दूरदर्शी कदम की अपेक्षा

आईसीआईएम को विश्वास है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता के तहत यह सुधार शीघ्र लागू होगा। इससे:
• श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच बेहतर औद्योगिक संबंध स्थापित होंगे।
• अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी और लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण संभव होगा।
• निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और प्रदेश में नई औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित होंगी।
• रोज़गार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
• उत्तर प्रदेश को भारत का सबसे आकर्षक औद्योगिक राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

आईसीआईएम ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि गौतम बुद्ध नगर में श्रम विभाग के लिए अतिरिक्त पदों को तत्काल मंज़ूरी दी जाए और अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। यह निर्णय प्रदेश के औद्योगिक ढाँचे को मज़बूत करने और श्रमिकों व नियोक्ताओं दोनों को राहत देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उत्तर प्रदेश के $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में यह सुधार एक अहम उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।